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Wednesday, July 29, 2020

Maha Mrityunjaya Jaap | Sonu Nigam


ॐ त्र्यम्बकं यजामहे 
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् 
उर्वारुकमिव बन्धनान् 
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्

Friday, July 24, 2020

Shiva Natraj Stuti - Sat Srushti Tandav || सत सृष्टि तांडव रचयिता नटराज राज नमो नमः ||


सत सृष्टि तांडव रचयिता नटराज राज नमो नमः| 
हे आद्य गुरु शंकर पिता नटराज राज नमो नमः| 

गंभीर नाद मृदंगना धबके उरे ब्रह्मांडमा 
नित होत नाद प्रचंडना नटराज राज नमो नमः| 

सिर ज्ञान गंगा चंद्र मा चिद ब्रह्म ज्योति ललाट मा 
विष नाग माला कंठ मा नटराज राज नमो नमः|
 
तवशक्ति वामागे स्थिता हे चन्द्रिका अपराजिता  
चहु वेद गावे संहिता नटराज राज नमो नमः |

हे नाथ जानि अजान बालक विश्वनाथ महेश्वरम | हे नाथ प्रार्थना Hey Nath Prarthana I Hindi Lyrics I Full HD Video Song


हे नाथ जानि अजान बालक विश्वनाथ महेश्वरम |
करिके कृपा दीजो दरस अविनाशी शंकर सुन्दरम ||
आया शरण हूँ आपकी इतनी अनुग्रह किजीये |
जय चंद्र मौली कृपालु अब तुम दरश मोको दीजिये ||

ले राम नाम निशंक कीन्हों है गरल आहार तुम |
भव सिंधु से नैया कर देना भोला पार तुम ||
मनसा वाचा कर्मणो से पाप-अति हमने कियो |
आयो शरण शरणागति सुध नहीं अब तक लियो ||

अब तो तुम्हारे हाथ है, गिरिजापति मेरी गति|
जय पशुपति, जय पशुपति, जय पशुपति, जय पशुपति ||

जय जयति योगेश्वर तुम्ही बल, बुद्धि के प्रकाश तुम |
मन-मंदिर बीज निवास करिये जानि जन सुख राशि तुम ||

लज्जा हमारी रखना शिव आपके ही हाथ है |
तुमसा ना कोई भक्त दयालू वत्सल कृपालु दीनानाथ है ||

त्रय ताप मोचन जय त्रिलोचन पूर्ण पारावार जय |
कैलाशवासी सिद्ध काशी दया के अधर जय ||

शिव दया के सिंधु हो जन है शरण जन फेरिए |
करिके कृपा की कोर शंकर दीन जन दिशि हेरिये ||
शुभ बेल के कुछ पत्र हैं, कुछ पुष्प हैं मंदार के |
फल है धतूरे के धरे, कुछ संग अछत धारि के ||

सेवा हमारी तुच्छ है, फल कामना मन मे बड़ी |
पर आशा भोले नाथ से, रहती ह्रदय मे बड़ी ||

हे विश्वनाथ महेश अपनी, भक्ति कृपया दीजिये |
निर्भय निडर निशंक करिये, शक्ति अपनी दीजिये ||

हो सत्य व्रतधारी ह्रदय मे, भावना ऐसी भरें |
बम बम हरे, बम बम हरे, बम बम हरे, बम बम हरे ||

मण्डित जटा मे गंग धारा, ताप लोको के हरे |
शशिभाल तब यश चाद्रिका , सबके ह्रदय शीतल करें ||

वर दे वरद वरदानियों धन धान्य से धरती भरें |
जय शिव हरे, जय शिव हरे, जय शिव हरे, जय शिव हरे||
वर दे वरद वरदानियों धन धान्य से धरती भरें |
जय शिव हरे, जय शिव हरे, जय शिव हरे, जय शिव हरे||

Song Credit:

Singer: ASHWANI AMARNATH 
Music Director: RAVI BHAN 
Lyrics: TRADITIONAL 
Album: JAI GIRIJAPATI DEENDAYALA 
Music Label: T-Series

Friday, February 7, 2020

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा । ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा


जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा ।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।
हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे ।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूलधारी ।
सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।
प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा ।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा ।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला ।
शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी ।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे ।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥
ॐ जय शिव ओंकारा

महाशिवरात्रि की ढेरों शुभकामनाऐं।

सौराष्ट्रे सोमनाथंच श्री शैले मल्लिकार्जुनम् ।
उज्जयिन्यां महाकालमोंकारममलेश्वरम् ॥

केदारे हिगवत्पृष्ठे डाकिन्यां भीमशंकरम् ।
वाराणस्यांच विश्वेशं त्र्यम्बंक गौतमी तटे ॥

वैद्यनाथं चिताभूमौ नागेशं दारुकावने ।
सेतुबन्धे च रामेशं घृष्णेशंच शिवालये ॥

एतानि ज्योतिर्लिंगानि प्रातरुत्थाय य: पठेत् ।
जन्मान्तर कृत पापं स्मरणेन विनश्यति ॥

Monday, August 13, 2018

Aarti karo Harihar ki karo Natwar ki. Bhole Shankar ki. Aarti karo Shankar ki.

Aarti karo Harihar ki karo Natwar ki
Bhole Shankar ki.
Aarti karo Shankar ki.

Sar par sheesh ka mukut sanwaare
Taaron ki payal jhankaare
Dharti Ambar dole, tandav leela se Natwar ki.
Aarti karo Shankar ki.

Fanee ka haar pehanne wale Shamboo hai jag ke rakhwale
Sakal Vishwa naache ungali pe Vishdhar ki.
Aarti karo Shankar ki.

Mahadev Jai-Jai Shiv Shankar Jai Gangadhar Jai Damroodhar
Hey Devon ke Dev mitao tum vipadha ghar-ghar ki.
Aarti karo Shankar ki.

Wednesday, February 17, 2016

श्री शिव पंचाक्षरी स्तोत्रम – Shiva Panchakshari Stotram

श्री शिव पंचाक्षरी स्तोत्रम 
Shiva Panchakshari Stotram

ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ
ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ
नागॆन्द्रहाराय त्रिलॊचनाय
भस्माङ्गरागाय महॆश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै “न” काराय नमः शिवाय ॥ 1 ॥

मन्दाकिनी सलिल चन्दन चर्चिताय
नन्दीश्वर प्रमथनाथ महॆश्वराय ।
मन्दार मुख्य बहुपुष्प सुपूजिताय
तस्मै “म” काराय नमः शिवाय ॥ 2 ॥

शिवाय गौरी वदनाब्ज बृन्द
सूर्याय दक्षाध्वर नाशकाय ।
श्री नीलकण्ठाय वृषभध्वजाय
तस्मै “शि” काराय नमः शिवाय ॥ 3 ॥

वशिष्ठ कुम्भॊद्भव गौतमार्य
मुनीन्द्र दॆवार्चित शॆखराय ।
चन्द्रार्क वैश्वानर लॊचनाय
तस्मै “व” काराय नमः शिवाय ॥ 4 ॥

यज्ञ स्वरूपाय जटाधराय
पिनाक हस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय दॆवाय दिगम्बराय
तस्मै “य” काराय नमः शिवाय ॥ 5 ॥

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठॆच्छिव सन्निधौ ।
शिवलॊकमवाप्नॊति शिवॆन सह मॊदतॆ ॥

Wednesday, December 30, 2015

Om Jai Shiv Omkara ( Lyrics & Meaning ) | Most Popular Devotional Aarti


Om Shiv Omkara is a prayer song made to Lord Shiva. The meaning of the song is also displayed for convenience. Listen to this devotional song and sing along.

Saturday, July 12, 2014

कर्पूरगौरं करुणावतारम् | संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् || सदा वसन्तं हृदयारविन्दे | भवं भवानि सहितं नमामि ||

कर्पूरगौरं करुणावतारम् |
संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ||
सदा वसन्तं हृदयारविन्दे |
भवं भवानि सहितं नमामि ||

Sunday, April 27, 2014

श्री शिवाष्टक स्तोत्रं संपूर्णम्‌

जय शिवशंकर, जय गंगाधर, करुणा-कर करतार हरे,
जय कैलाशी, जय अविनाशी, सुखराशि, सुख-सार हरे
जय शशि-शेखर, जय डमरू-धर जय-जय प्रेमागार हरे,
जय त्रिपुरारी, जय मदहारी, अमित अनन्त अपार हरे,
निर्गुण जय जय, सगुण अनामय, निराकार साकार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥

जय रामेश्वर, जय नागेश्वर वैद्यनाथ, केदार हरे,
मल्लिकार्जुन, सोमनाथ, जय, महाकाल ओंकार हरे,
त्र्यम्बकेश्वर, जय घुश्मेश्वर भीमेश्वर जगतार हरे,
काशी-पति, श्री विश्वनाथ जय मंगलमय अघहार हरे,
नील-कण्ठ जय, भूतनाथ जय, मृत्युंजय अविकार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥

जय महेश जय जय भवेश, जय आदिदेव महादेव विभो,
किस मुख से हे गुरातीत प्रभु! तव अपार गुण वर्णन हो,
जय भवकार, तारक, हारक पातक-दारक शिव शम्भो,
दीन दुःख हर सर्व सुखाकर, प्रेम सुधाधर दया करो,
पार लगा दो भव सागर से, बनकर कर्णाधार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥

जय मन भावन, जय अति पावन, शोक नशावन,
विपद विदारन, अधम उबारन, सत्य सनातन शिव शम्भो,
सहज वचन हर जलज नयनवर धवल-वरन-तन शिव शम्भो,
मदन-कदन-कर पाप हरन-हर, चरन-मनन, धन शिव शम्भो,
विवसन, विश्वरूप, प्रलयंकर, जग के मूलाधार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥

भोलानाथ कृपालु दयामय, औढरदानी शिव योगी, सरल हृदय,
अतिकरुणा सागर, अकथ-कहानी शिव योगी, निमिष में देते हैं,
नवनिधि मन मानी शिव योगी, भक्तों पर सर्वस्व लुटाकर, बने मसानी
शिव योगी, स्वयम्‌ अकिंचन,जनमनरंजन पर शिव परम उदार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥

आशुतोष! इस मोह-मयी निद्रा से मुझे जगा देना,
विषम-वेदना, से विषयों की मायाधीश छड़ा देना,
रूप सुधा की एक बूँद से जीवन मुक्त बना देना,
दिव्य-ज्ञान- भंडार-युगल-चरणों को लगन लगा देना,
एक बार इस मन मंदिर में कीजे पद-संचार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥

दानी हो, दो भिक्षा में अपनी अनपायनि भक्ति प्रभो,
शक्तिमान हो, दो अविचल निष्काम प्रेम की शक्ति प्रभो,
त्यागी हो, दो इस असार-संसार से पूर्ण विरक्ति प्रभो,
परमपिता हो, दो तुम अपने चरणों में अनुरक्ति प्रभो,
स्वामी हो निज सेवक की सुन लेना करुणा पुकार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥

तुम बिन ‘बेकल’ हूँ प्राणेश्वर, आ जाओ भगवन्त हरे,
चरण शरण की बाँह गहो, हे उमारमण प्रियकन्त हरे,
विरह व्यथित हूँ दीन दुःखी हूँ दीन दयालु अनन्त हरे,
आओ तुम मेरे हो जाओ, आ जाओ श्रीमंत हरे,
मेरी इस दयनीय दशा पर कुछ तो करो विचार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥

॥ इति श्री शिवाष्टक स्तोत्रं संपूर्णम्‌ ॥

अर्धनारीश्वरस्तोत्रम

चांपेयगौरार्ध शरीरकायै कर्पूरगौरार्ध शरीरकाय ।
धम्मिल्लकायै च जटाधराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

कस्तूरिका कुंकुमचर्चितायै चितारजःपुञ्जविचर्चिताय ।
कृतस्मरायै विकृतस्मराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

झणत्क्वणत्कंकण नूपुरायै पादाब्जराजत्फणिनूपुराय ।
हेमाङ्गदायै भुजगाङ्गदाय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

विशालनीलोत्पललोचनायै विकासिपङ्केरुहलोचनाय ।
समेशणायै विषमेशणाय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

मन्दारमालाकलितालकायै कपालमालाङ्कितकन्धराय ।
दिव्यांबरायै च दिगंबराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

अंभोधरश्यामलकुंतलायै तटित्प्रभाताम्रजटाधराय ।
निरीश्वरायै निखिलेश्वराय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

प्रपञ्चसृष्ट्युन्मुखलास्यकायै समस्तसंहारकताण्डवाय ।
जगज्जनन्यै जगदेकपित्रे नमह शिवायै च नमः शिवाय ॥

प्रदीप्तरत्नोज्ज्वलकुण्डलायै स्फुरन्महापन्नगभूषणाय ।
शिवान्वितायै च शिवान्विताय नमः शिवायै च नमः शिवाय ॥

एतत्पठेदष्टकमिष्टदं यो भक्त्या स मान्यो भुवि दीर्घजीवी ।
प्राप्नोति सौभाग्यमनन्तकालं भूयात सदा तस्य समस्तसिद्दिः ॥

। इति श्री शङ्कर भगवत्पाद विरचितम अर्धनारीश्वरस्तोत्रम ।

Sunday, July 21, 2013

Namami Shamishan Nirvan Roopam

Namami Shamishan Nirvan Roopam
Vibhum Vyapakam Brahma Veda Swaroopam
Nijam Nirgunam Nirvikalpam Nireeham
Chidakasamaakasa Vasam Bhajeham

Niraakara Monkaara Moolam Thureeyam
Giraa Jnana Gotheethamesam Gireesam
Karalam Maha Kala Kalam Krupalam
Gunaa Gara Samsara Param Nathoham

Thushaaraadhi Sankasa Gowram Gabheeram,
Mano Bhootha Koti Prabha Sree Sareeram,
Sphuran Mouli Kallolini Charu Ganga,
Lasaddala Balendu Kante Bhujanga

Chalath Kundalam Bru Sunethram Vishaalam,
Prasannananam Neela Kandam Dhayalam,
Mugadheesa Charmambaeam Munda Malam,
Priyam Shankaram Sarva Nadham Bhajami

Prachandam Prakrushtam Prakalbham Paresam,
Akhandam Ajam Bhanu Koti Prakasam,
Thraya Soola Nirmoolanam Soola Panim,
Bhajeham Bhavani Pathim Bhava Gamyam

Kalatheetha Kalyani Kalpanthakari,
Sada Sajjananda Datha Purari,
Chidananda Sandoha Mohapahari,
Praseeda Praseeda Prabho Mamamadhari

Na Yavad Umanada Padaravindam,
Bhajantheeha Loke Pare Vaa Naraanaam,
Na Thath Sukham Shanthi Santhapa Nasam,
Praseedha Prabho Sarva Bhoothadhivasam

Na Janami Yogam, Japam, Naiva Poojaam,
Nathoham Sada Sarvadha Shambhu Thubhyam,
Jara Janma Dukhogha Thathpyamanam,
Prabho Pahi Aapannamameesa Shambho

Rudhrashtakam Idham Proktham Viprena Hara Thoshaye,
Ye Padanthi Naraa Bhakthya Thesham Shambhu Praseedathi

Monday, July 1, 2013

शिव स्तुति

शिव स्तुति

सदा -शंकरं, शंप्रदं, सज्जनानंददं, शैल - कन्या - वरं, परमरम्यं ।
काम - मद - मोचनं, तामरस - लोचनं, वामदेवं भजे भावगम्यं ॥१॥

कंबु - कुंदेंदु - कर्पूर - गौरं शिवं, सुंदरं, सच्चिदानंदकंदं ।
सिद्ध - सनकादि - योगींद्र - वृंदारका, विष्णु - विधि - वन्द्य चरणारविंदं ॥२॥

ब्रह्म - कुल - वल्लभं, सुलभ मति दुर्लभं, विकट - वेषं, विभुं, वेदपारं ।
नौमि करुणाकरं, गरल - गंगाधरं, निर्मलं, निर्गुणं, निर्विकारं ॥३॥

लोकनाथं, शोक - शूल - निर्मूलिनं, शूलिनं मोह - तम - भूरि - भानुं ।
कालकालं, कलातीतमजरं, हरं, कठिन - कलिकाल - कानन - कृशानुं ॥४॥

तज्ञमज्ञान - पाथोधि - घटसंभवं, सर्वगं, सर्वसौभाग्यमूलं ।
प्रचुर - भव - भंजनं, प्रणत - जन - रंजनं, दास तुलसी शरण सानुकूलं ॥५॥

श्री शिवाष्टक स्तोत्रं

कर्पुर गौरम करुणावतारम् सन्सार सारं भुजगेन्द्र हारम्।
सदा वसन्तम् हृदयार्वरिन्दे भवं भवानी सहितम् नमामि।

जय शिवशंकर, जय गंगाधर, करुणा-कर करतार हरे,
जय कैलाशी, जय अविनाशी, सुखराशि, सुख-सार हरे
जय शशि-शेखर, जय डमरू-धर जय-जय प्रेमागार हरे,
जय त्रिपुरारी, जय मदहारी, अमित अनन्त अपार हरे,
निर्गुण जय जय, सगुण अनामय, निराकार साकार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
 
जय रामेश्वर, जय नागेश्वर वैद्यनाथ, केदार हरे,
मल्लिकार्जुन, सोमनाथ, जय, महाकाल ओंकार हरे,
त्र्यम्बकेश्वर, जय घुश्मेश्वर भीमेश्वर जगतार हरे,
काशी-पति, श्री विश्वनाथ जय मंगलमय अघहार हरे,
नील-कण्ठ जय, भूतनाथ जय, मृत्युंजय अविकार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
 
जय महेश जय जय भवेश, जय आदिदेव महादेव विभो,
किस मुख से हे गुरातीत प्रभु! तव अपार गुण वर्णन हो,
जय भवकार, तारक, हारक पातक-दारक शिव शम्भो,
दीन दुःख हर सर्व सुखाकर, प्रेम सुधाधर दया करो,
पार लगा दो भव सागर से, बनकर कर्णाधार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
 
जय मन भावन, जय अति पावन, शोक नशावन,
विपद विदारन, अधम उबारन, सत्य सनातन शिव शम्भो,
सहज वचन हर जलज नयनवर धवल-वरन-तन शिव शम्भो,
मदन-कदन-कर पाप हरन-हर, चरन-मनन, धन शिव शम्भो,
विवसन, विश्वरूप, प्रलयंकर, जग के मूलाधार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
 
भोलानाथ कृपालु दयामय, औढरदानी शिव योगी, सरल हृदय,
अतिकरुणा सागर, अकथ-कहानी शिव योगी, निमिष में देते हैं,
नवनिधि मन मानी शिव योगी, भक्तों पर सर्वस्व लुटाकर, बने मसानी
शिव योगी, स्वयम्‌ अकिंचन,जनमनरंजन पर शिव परम उदार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
 
आशुतोष! इस मोह-मयी निद्रा से मुझे जगा देना,
विषम-वेदना, से विषयों की मायाधीश छड़ा देना,
रूप सुधा की एक बूँद से जीवन मुक्त बना देना,
दिव्य-ज्ञान- भंडार-युगल-चरणों को लगन लगा देना,
एक बार इस मन मंदिर में कीजे पद-संचार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
 
दानी हो, दो भिक्षा में अपनी अनपायनि भक्ति प्रभो,
शक्तिमान हो, दो अविचल निष्काम प्रेम की शक्ति प्रभो,
त्यागी हो, दो इस असार-संसार से पूर्ण विरक्ति प्रभो,
परमपिता हो, दो तुम अपने चरणों में अनुरक्ति प्रभो,
स्वामी हो निज सेवक की सुन लेना करुणा पुकार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
 
तुम बिन ‘बेकल’ हूँ प्राणेश्वर, आ जाओ भगवन्त हरे,
चरण शरण की बाँह गहो, हे उमारमण प्रियकन्त हरे,
विरह व्यथित हूँ दीन दुःखी हूँ दीन दयालु अनन्त हरे,
आओ तुम मेरे हो जाओ, आ जाओ श्रीमंत हरे,
मेरी इस दयनीय दशा पर कुछ तो करो विचार हरे।
पार्वती पति हर-हर शम्भो, पाहि पाहि दातार हरे॥
 
॥ इति श्री शिवाष्टक स्तोत्रं संपूर्णम्‌ ॥

Sunday, June 16, 2013

नमस्ते भगवान रुद्र भास्करामित तेजसे|

नमस्ते भगवान रुद्र भास्करामित तेजसे|
नमो भवाय देवाय रसायाम्बुमयात्मने||
ब्रह्माजी बोले कि हे भगवान! हे रुद्र! आपका तेज अनगिनत सूर्यों के तेज सा है| 
रसरूप, जलमय विग्रहवाले हे भवदेव! आपको नमस्कार है|
 
शर्वाय क्षितिरूपाय नंदीसुरभये नमः|
ईशाय वसवे सुभ्यं नमः स्पर्शमयात्मने||
नंदी और सुरभि कामधेनु भी आपके ही प्रतिरूप हैं| 
पृथ्वी को धारण करनेवाले हे शर्वदेव! आपको नमस्कार है| 
हे वायुरुपधारी, वसुरुपधारी आपको नमस्कार है|
 
पशूनां पतये चैव पावकायातितेजसे|
भीमाय व्योम रूपाय शब्द मात्राय ते नमः||
अग्निरुप तेज व पशुपति रूपवाले हे देव! आपको नमस्कार है| 
शब्द तन्मात्रा से युक्त आकाश रूपवाले हे भीमदेव! आपको नमस्कार है|
 
उग्रायोग्रास्वरूपाय यजमानात्मने नमः|
महाशिवाय सोमाय नमस्त्वमृत मूर्तये||
हे उग्ररूपधारी यजमान सदृश आपको नमस्कार है| 
सोमरूप अमृतमूर्ति हे महादेव! आपको नमस्कार है|

सदाशिव लिंगं

ब्रह्ममुरारिसुरार्चित लिगं निर्मलभाषितशोभित लिंग |
जन्मजदुःखविनाशक लिंग तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥१
देवमुनिप्रवरार्चित लिंगं, कामदहं करुणाकर लिंगं|
रावणदर्पविनाशन लिंगं तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥२
सर्वसुगंन्धिसुलेपित लिंगं, बुद्धिविवर्धनकारण लिंगं|
सिद्धसुरासुरवन्दित लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥३
कनकमहामणिभूषित लिंगं, फणिपतिवेष्टितशोभित लिंगं|
दक्षसुयज्ञविनाशन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥४
कुंकुमचंदनलेपित लिंगं, पंङ्कजहारसुशोभित लिंगं|
संञ्चितपापविनाशिन लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥५
देवगणार्चितसेवित लिंग, भवैर्भक्तिभिरेवच लिंगं|
दिनकरकोटिप्रभाकर लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥६
अष्टदलोपरिवेष्टित लिंगं, सर्वसमुद्भवकारण लिंगं|
अष्टदरिद्रविनाशित लिंगं, तत्प्रणमामि सदाशिव लिंगं॥७
सुरगुरूसुरवरपूजित लिंगं, सुरवनपुष्पसदार्चित लिंगं|
परात्परं परमात्मक लिंगं, ततप्रणमामि सदाशिव लिंगं||

Thursday, June 6, 2013

तस्मै न काराय नमः शिवाय ।।

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय
भस्मंगरागाय महेश्वराय ।
नित्याय शुध्याय दिगम्बराय
तस्मै न काराय नमः शिवाय ।।

मंदा किनी सलिल चन्दन चर्चिताय
नन्दीश्वर प्रमथ नाथ महेश्वराय।
मंदार पुष्पबहु पुष्प सुपूजिताय 
तस्मै म काराय नमः शिवाय ।।

शिवाय गौरी बदनाब्जवृन्द
सूर्याय दक्षा ध्वरनाशकाय।
श्री नीलकंठाय वृषध्वजाय 
तस्मै शि काराय नमः शिवाय ।।

वसिष्ठ कुम्भो द्भव गौतमार्य- मुनीन्द्र देवार्चितशेखराय ।
चन्द्रार्क वैश्वा नरलोचलाय 
तस्मै व काराय नमः शिवाय।।

यक्षस्व रूपाय जटाधराय पिनाक हस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय देवाय दिगम्बराय 
तस्मै य काराय नमः शिवाय ।।

पंचाक्षर मिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसन्निधौ ।
शिव लोक मवा प्नोति शिवेनसः मोदते।।

ॐ नम: शिवाय॥

श्रीरूद्राष्टकं

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं
विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं
चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं॥1॥

निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं
गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं।
करालं महाकाल कालं कृपालं
गुणागार सँसारपारं नतोऽहं॥2॥

तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं
मनोभूत कोटि प्रभा श्री शरीरं।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारू गंगा
लषद्भालबालेन्दु कंठे भुजंगा॥3॥

चलत्कुंडलं भ्रू सुनेत्रं विशालं
प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुंडमालं
प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि॥4॥

प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं
अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं।
त्रय: शूल निर्मूलनं शूलपाणिं
भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं॥5॥

कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी
सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी।
चिदानंद संदोह मोहापहारी
प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी॥6॥

न यावद्‌ उमानाथ पादारविन्दं
भजंतीह लोके परे वा नराणाम्‌।
न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं
प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं॥7॥

न जानामि योगं जपं नैव पूजां
नतोऽहं सदा सर्वदा शंभु तुभ्यं।
जरा जन्म दु:खौघ तातप्यमानं
प्रभो पाहि आपन्नमामीश शंभो॥8॥

रूद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये।
ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भु: प्रसीदति॥9॥

इति श्रीगोस्वामितुलसीदासकृतं श्रीरूद्राष्टकं सम्पूर्णम्।

यो भूस्वरूपेणविभर्तिविश्वं पायात्सभूमेर्गिरीशोष्टमूर्ति:। योऽपांस्वरूपेणनृपांकरोति संजीवनंसोऽवतुमां जलेभ्य:॥

यो भूस्वरूपेणविभर्तिविश्वं 
पायात्सभूमेर्गिरीशोष्टमूर्ति:। 
योऽपांस्वरूपेणनृपांकरोति 
संजीवनंसोऽवतुमां जलेभ्य:॥

जिन्होंने पृथ्वीरूपसे इस विश्व को धारण कर रखा है, वे अष्टमूर्तिगिरीश पृथ्वी से मेरी रक्षा करें। जो जल रूप से जीवों को जीवनदान दे रहे हैं, वे शिव जल से मेरी रक्षा करें।