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Wednesday, February 17, 2016

श्री शिव पंचाक्षरी स्तोत्रम – Shiva Panchakshari Stotram

श्री शिव पंचाक्षरी स्तोत्रम 
Shiva Panchakshari Stotram

ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ
ॐ नमः शिवाय शिवाय नमः ॐ
नागॆन्द्रहाराय त्रिलॊचनाय
भस्माङ्गरागाय महॆश्वराय ।
नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय
तस्मै “न” काराय नमः शिवाय ॥ 1 ॥

मन्दाकिनी सलिल चन्दन चर्चिताय
नन्दीश्वर प्रमथनाथ महॆश्वराय ।
मन्दार मुख्य बहुपुष्प सुपूजिताय
तस्मै “म” काराय नमः शिवाय ॥ 2 ॥

शिवाय गौरी वदनाब्ज बृन्द
सूर्याय दक्षाध्वर नाशकाय ।
श्री नीलकण्ठाय वृषभध्वजाय
तस्मै “शि” काराय नमः शिवाय ॥ 3 ॥

वशिष्ठ कुम्भॊद्भव गौतमार्य
मुनीन्द्र दॆवार्चित शॆखराय ।
चन्द्रार्क वैश्वानर लॊचनाय
तस्मै “व” काराय नमः शिवाय ॥ 4 ॥

यज्ञ स्वरूपाय जटाधराय
पिनाक हस्ताय सनातनाय ।
दिव्याय दॆवाय दिगम्बराय
तस्मै “य” काराय नमः शिवाय ॥ 5 ॥

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठॆच्छिव सन्निधौ ।
शिवलॊकमवाप्नॊति शिवॆन सह मॊदतॆ ॥

Thursday, March 7, 2013

शिव अनंत शक्ति विश्व दीप्ति सत्य सुन्दरम

शिव अनंत शक्ति विश्व दीप्ति सत्य सुन्दरम /
प्रसीद मे प्रभो अनादि देव जीवितेश्वरम //
नमो नमो सदा शिवं पिनाकपाणि शंकरम /
जटान मध्य जान्ह्वी झ्ररर्झरति सुनिर्झरम //
भाल चन्द्र स्थितं भुजंगमाल शोभितम /
नमोस्तु रूद्ररूप ज्ञानगम्य हे महेश्वरम //१//
 
कराल कालकंटकं कृपालु सुर मुनीन्द्र्कम /
ललाट अक्ष धारकम प्रभो त्रिलोक नायकम //
परंतपं शिवम शुभम निरंक नित्य चिंतनम /
नमोस्तु रूद्ररूप ज्ञानगम्य हे महेश्वरम //२//
 
महास्वनं मृड़ोनटं त्रिशूलधर अरिन्दमम /
महायशं जलेश्वरं वसुश्रुआ धनागमम //
निरामयं निरंजनं महाधनं जरोतगम /
नमोस्तु रूद्ररूप ज्ञानगम्य हे महेश्वरम //३//
 
कनकप्रभं दुराधरं देवाधिदेव अव्ययम /
परावरं प्रभंजनम वरेण्य छिन्न संशयम //
अमृतपं अजितप्रियं उन्न्घ्रम अद्र्यालयम / .>.
नमोस्तु रूद्ररूप ज्ञानगम्य हे महेश्वरम //४//
 
परात्परं प्रभाकरं तमोहरं त्र्यम्बकम /
महाधिपं निरान्तकं स्तव्य कीर्तिभूषणम//
अनामयं मनोजवं चतुर्भुजं त्रिलोचनम /
नमोस्तु रूद्ररूप ज्ञानगम्य हे महेश्वरम//५//
 
स्तुत्य आम्नाय शम्भु शम्बरं परंशुभम /
महाहदं पदाम्बुजं रति: प्रतिक्षणम मम //
विद्वतं विरोचनं परावरज्ञ सिद्धिदम /
नमोस्तु रूद्ररूप ज्ञानगम्य हे महेश्वरम //६//
 
आत्मभू नभोगतिं जगदगुरुम नमो शिवम /
अलभ्य भक्ति देहि मे करोतु मे परम सुखम //
ओमकार ईश्वरं गणेश्वरम धनेश्वरम /
नमोस्तु रूद्ररूप ज्ञानगम्य हे महेश्वरम //७//
 
शिवस्य नाम अमृतं "उदय" त्रिताप नाशनम /
करोतु जाप मे मनम नमो नम: शिवम शिवम //
मोक्षदं नमो महेश ओमकार त्वम स्वयम /
नमोस्तु रूद्ररूप ज्ञानगम्य हे महेश्वरम //८//
 
पूजनं न अर्चनं न शक्ति भक्ति साधनम /
जपं न योग आसनं उपासनं आराधनम //
मन गुनंत प्रतिक्षणं शिवम शिवम शिवम शिवम /
नमोस्तु रूद्ररूप ज्ञानगम्य हे महेश्वरम //९ //

निरंजनो निराकरो एको देवो महेश्वर

"निरंजनो निराकरो एको देवो महेश्वर:।
मृत्यू मुखम् गतात् प्राणं बलात रक्षति:॥"

"निरंजन एंव निराकार महेश्वर ही एक मात्र देव हैं 
जो मृत्यू के मुख मे गए हुए प्राणों की बलपुर्वक रक्षा करने में समर्थ हैं।"

 ♥ ~ हर हर महादेव ~ ♥

Monday, May 7, 2012

Devon Ke Dev Mahadev

Shiva Shiva Shiva Shiva 
Shiva Shiva Shiva Shiva 
Aadi Anant Shiva 
Aadi Anant Shiva 
Yogi Mahadev 
Yogi Mahadev 
Mahabali Shiva 
Mahabali Shiva 
Shiva Shiva Shiva Shiva 
Shiva Shiva Shiva Shiva 

namami shamishan nirvan roopam 
vibhum vyapakam bramh ved swaroopam |
nijam nirgunam nirvikalpam niriham 
chidakashmakashvasam bhajeham ||1||

nirakaromkarmulam turiyam
gira gyan gotitamisham girisham |
karalam mahakal kalam kripalam
gunagar sansarparam natoham ||2||

Karpura gauram karunavataram
Sansarasaram bhujagendra haram
Sada vasantam hridayarvinde
Bhavam bhavani sahitam namami

Monday, March 19, 2012

SHIV TANDAV STOTRA - शिव तांडव स्त्रोतम्

SHIV TANDAV STOTRA
शिव तांडव स्त्रोतम्

जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थलेगलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌।डमड्डमड्डमड्डमनिनादवड्डमर्वयंचकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥

जटा कटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी ।विलोलवी चिवल्लरी विराजमानमूर्धनि ।धगद्धगद्ध गज्ज्वलल्ललाट पट्टपावकेकिशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं ममं ॥2॥

धरा धरेंद्र नंदिनी विलास बंधुवंधुर-स्फुरदृगंत संतति प्रमोद मानमानसे ।कृपाकटाक्षधारणी निरुद्धदुर्धरापदिकवचिद्विगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥

जटा भुजं गपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा-कदंबकुंकुम द्रवप्रलिप्त दिग्वधूमुखे ।मदांध सिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरेमनो विनोदद्भुतं बिंभर्तु भूतभर्तरि ॥4॥

सहस्र लोचन प्रभृत्य शेषलेखशेखर-प्रसून धूलिधोरणी विधूसरांघ्रिपीठभूः ।भुजंगराज मालया निबद्धजाटजूटकःश्रिये चिराय जायतां चकोर बंधुशेखरः ॥5॥

ललाट चत्वरज्वलद्धनंजयस्फुरिगभा-निपीतपंचसायकं निमन्निलिंपनायम्‌ ।सुधा मयुख लेखया विराजमानशेखरंमहा कपालि संपदे शिरोजयालमस्तू नः ॥6॥

कराल भाल पट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-द्धनंजया धरीकृतप्रचंडपंचसायके ।धराधरेंद्र नंदिनी कुचाग्रचित्रपत्रक-प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम ॥7॥

नवीन मेघ मंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर-त्कुहु निशीथिनीतमः प्रबंधबंधुकंधरः ।निलिम्पनिर्झरि धरस्तनोतु कृत्ति सिंधुरःकलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

प्रफुल्ल नील पंकज प्रपंचकालिमच्छटा-विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदंगजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥

अगर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी-रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌ ।स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकंगजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुर-द्धगद्धगद्वि निर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्-धिमिद्धिमिद्धिमि नन्मृदंगतुंगमंगल-ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजंग मौक्तिकमस्रजो-र्गरिष्ठरत्नलोष्टयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोःसमं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

कदा निलिंपनिर्झरी निकुजकोटरे वसन्‌विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌ ।विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकःशिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥13॥

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-निगुम्फनिर्भक्षरन्मधूष्णिकामनोहरः ।तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशंपरिश्रय परं पदं तदंगजत्विषां चयः ॥14॥

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणीमहाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिःशिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम्‌ ॥15॥

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवंपठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌ ।हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नांयथा गतिंविमोहनं हि देहना तु शंकरस्य चिंतनम ॥16॥

पूजाऽवसानसमये दशवक्रत्रगीतंयः शम्भूपूजनमिदं पठति प्रदोषे ।तस्य स्थिरां रथगजेंद्रतुरंगयुक्तांलक्ष्मी सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥17॥

॥ इति शिव तांडव स्तोत्रं संपूर्णम्‌ ॥

Sunday, March 18, 2012

Karpoor Gauram Karunavtaram


कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् । 
सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥

Wednesday, February 8, 2012

ॐ नमः शिवाय

................ॐ नमः शिवाय
..............ॐ नमः... शिवाय
.............ॐ नमः.. ....शिवाय
.............ॐ नमः.. ....शिवाय
.............ॐ नमः .....शिवाय
...ॐ नमः शिवाय...ॐ नमः शिवाय.ॐ नमः शिवाय..ॐ नमः शिवाय
...ॐ नमः शिवाय.ॐ नमः शिवाय..ॐ नमः शिवाय..ॐ नमः शिवाय
...ॐ नमः शिवाय.....ॐ नमः शिवाय....ॐ नमः शिवाय
...ॐ नमः शिवाय....ॐ नमः शिवाय
..............ॐ नमः.शिवाय
............ॐ नमः....शिवाय
...........ॐ नमः..... शिवाय
..ॐ नमः शिवाय...ॐ नमः शिवाय..ॐ नमः
..शिवाय...ॐ नमः शिवाय..ॐ नमः शिवाय
..ॐ नमः शिवाय..ॐ नमः शिवाय..ॐ नमः
..ॐ नमः शिवाय..ॐ नमः शिवाय..ॐ नमः

Sunday, February 5, 2012

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् । सदावसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि ॥

कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारम् भुजगेन्द्रहारम् ।
सदावसन्तं हृदयारविन्दे
भवं भवानीसहितं नमामि ॥

Karpuura-Gauram Karunna-Avataaram
Samsaara-Saaram Bhujage[a-I]ndra-Haaram |
Sadaa-Vasantam Hrdaya-Aravinde
Bhavam Bhavaanii-Sahitam Namaami ||

MEANING
Pure White like Camphor, an Incarnation of Compassion,
The Essence of Worldly Existence, Whose Garland is the King of Serpents,
Always Dwelling in the Lotus of the Heart.
I Bow to Shiva and Shakti Together.